JAL SANRAKSHAN

Hindon River, a tributary of Yamuna river, is a river in India that originates in the Saharanpur District, from Upper Shivalik in Lower Himalayan Range. The river is entirely rainfed and has a catchment area of 7,083 square kilometres (2,735 sq mi).

हमारे बारे में थोड़ी अधिक जानकारी

जनपद-मुजफ्फरनगर में मूलतः हिण्डन, काली, सलोनी, नागिन (अन्तवाडा, विकास खण्ड-खतौली) नदी तथा भारत की राष्ट्रीय नदी गंगा बहती हैं।

हिण्डन नदी जनपद-सहारनपुर से जनपद-मुजफ्फरनगर के विकास खण्ड-चरथावल में प्रवेश करती है एवं जनपद के विकास खण्ड-बघरा, शाहपुर तथा बुढ़ाना क्षेत्र में बहती हुई जनपद-बागपत में प्रवेश करती है।

काली नदी जनपद-मुजफ्फरनगर के विकास खण्ड-पुरकाजी, चरथावल, सदर व खतौली से बहती हुई विकास खण्ड-बुढ़ाना में हिण्डन नदी मिल जाती है तथा जनपद-बागपत की सीमा में प्रवेश करती है।

सलोनी नदी जनपद के विकास खण्ड-पुरकाजी, मोरना, जानसठ़ व खतौली में बहती हुई जनपद-मेरठ में प्रवेश करती है।

जनपद के डार्क जोन में विकास खण्ड-चरथावल, बघरा, शाहपुर व बुढ़ाना है।

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राष्ट्रीय नदी गंगा के किनारे स्थित ग्राम पंचायतों का विकास खण्डवार विवरण

क्रं0सं0 नाम संख्या


हिण्डन एवं उसकी सहायक नदियों के किनारे स्थित ग्राम पंचायतों का विकास खण्डवार विवरण

क्रं0सं0 नाम संख्या

कार्य योजना - निर्मल हिण्डन, मुजफ्फरनगर

जनपद-मुजफ्फरनगर की न्याय पंचायतों में सम्मिलित ग्राम पंचायतों में विभागीय कार्यक्रमों के पर्यवेक्षण हेतु
विभिन्न 36 अधिकारियों को न्याय पंचायतें गोद दी गयी है।
उक्त 36 अधिकारीगण निम्नानुसार कार्य सम्पादित करायेंगे:-

पर्यवेक्षण कार्य

उक्त नामित अधिकारीगण शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं के पर्यवेक्षण का कार्य करेंगे।

स्वच्छ भारत

उक्त अधिकारीगण अपनी टीम गठित कराकर विभिन्न योजनाओं/ पम्फ्लेट्स के अनुसार स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) इत्यादि सभी कार्य सम्पादित करायेंगे।

कूडे का निस्तारण

साथ ही उक्त अधिकारीगण को आवंटित न्याय पंचायत क्षेत्र मेें सम्मिलित ग्राम पंचायतों में गीले व सूखे कूडे के निस्तारण के सम्बन्ध में जनसामान्य को अवगत करायेंगे।

तालाब जीर्णोद्धार

उक्त अधिकारीगण अपनी टीम गठित कराकर विभिन्न योजनाओं/ पम्फ्लेट्स के अनुसार तालाब जीर्णोद्धार इत्यादि सभी कार्य सम्पादित करायेंगे।

अधिकारियों का विवरण
क्रं0सं0 आवंटित विकास खण्ड आवंटित न्याय पंचायत नाम पदनाम मोबाईल नम्बर

भविष्य को सुरक्षित बनाओ, चलो नदियों को बचाओ.

जल से जीवन, जीवन ही जल, समझे जब तभी बचे जल।
जन-जन हमें जगाना होगा, जल सब तरह बचाना होगा।

Our Services

Our long-term bid is to clean up and rejuvenate the Hindon and reverse the river’s damage.

बोरा बाँध

झारखण्ड एवं गुजरात के 02 जिलों में ग्राम पंचायतों में उक्त कार्य किया जा रहा है।

जनपद के विकास खण्ड-बघरा, चरथावल, शाहपुर व बुढ़ाना हार्क जोने में है, उक्त विकास खण्डों में बोरा बाँध के माध्यम से जल स्तर में सुधार लाया जाना।

पशुपालन, कृषि व सिंचाई विभाग से कार्ययोजना बनवाकर माह-जुलाई से बोरा बाँध के सम्बन्ध में कार्यवाही किया जाना।

तालाब जीर्णोद्धार कार्य

ग्राम पंचायतों में स्थित तालाबों का चिन्हीकरण एवं वर्तमान स्थिति की जानकारी राजस्व विभाग के माध्यम से किया जाना

हिण्डन नदी के किनारे स्थित ग्रामों में तालाबों से अतिक्रमण हटवाये जाने हेतु उपजिलाधिकारियों के माध्यम से 67 ए के अन्तर्गत कार्यवाही कराते हुए अतिक्रमण हटवाया जाना।

मनरेगा के माध्यम से कार्ययोजना तैयार कर तालाबों का जीर्णोद्धार/खुदाई कराया जाना।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (N.H.A.I.) से सम्पर्क कर तालाबों की खुदाई कराकर मिट्टी राजमार्ग निर्माण हेतु दिया जाना।

वृक्षारोपण

तालाबों के किनारे-किनारे वन विभाग एवं मनरेगा के अन्तर्गत वृक्षारोपण कराया जाना।

हिण्डन एवं उसकी सहायक नदियों के किनारे पड़ने वाली सरकारी/ग्राम सभा की भूमि पर वन विभाग/मनरेगा के अन्तर्गत वृक्षारोपण कराया जाना।

एक व्यक्ति एक वृक्ष योजना के अन्तर्गत प्रत्येक व्यक्ति द्वारा न्यूनतम एक वृक्ष रोपित किया जाना लक्षित है। इस सम्बन्ध में जन सामान्य को न्याय पंचायतवार अधिकारियों के माध्यम से जागरूक किया जायेगा।

अन्य कार्य

न्याय पंचायतवार आवंटित ग्रामों में अधिकारीगण जनसामान्य को निर्मल हिण्डन परियोजना के सम्बन्ध में जागरूक करेंगे।

साथ ही कार्यो को ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना में सम्मिलित कराकर भी ग्राम पंचायत निधि से कार्य कराये जाना।

हिण्डन नदी के किनारे वाली ग्राम पंचायतों में गठित ‘‘निर्मल हिण्डन समिति‘‘ की तरह हिण्डन नदी की सहायक नदियों के किनारे पडने वाली ग्राम पंचायतों में समिति गठित किया जाना।

जैविक खेती

जैविक खेती एक प्राचीन कृषि पद्धति है, जो भूमि के प्राकृतिक स्वरूप को बनाये रखती है, पर्यावरण की शुद्धता को बनाये रखती है, मिट्टी की जल धारण क्षमता को बढाती है, इसमें रसायनों का प्रयोग कम होता है और कम लागत में गुणवत्तापूर्ण पैदावार होती है।

जैविक खेती के फायदें:-

जैविक खेती से ना केवल भूमि की उर्वरक शक्ति बनी रहती है, बल्कि उसमें वृद्धि भी होती है।

इस पद्धति से पर्यावरण प्रदूषण रहित होता है।

जैविक खेती में कम पानी की आवश्यकता होती है, जैव खेती पानी का संरक्षण करती है।

फसल अवशेषों को नष्ट करने की आवश्यकता नही होती है।

उत्तर गुणवत्ता की पैदावार का होना।

जैविक खेती में कम लागत आती है और मुनाफा अधिक होता है।

जैविक खेती में कीटो एवं बीमारियों का जैविक विधि से नियंत्रण करना चाहिये।

भण्डारण के लिये अनाज को खूब अच्छी तरह सुखाकर नीम की पत्ती या नमक या राचा आदि मिलाकर स्वच्छ स्थान पर या भूसा आदि से भण्डारित करना चाहिये।

हिण्डन एवं उसकी सहायक नदियों के किनारे वाली ग्राम पंचायतों में जैविक खेती हेतु कृषकों को प्रेरित किया जाना।

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